सरकारी कुप्रबन्धन, नजफगढ़ नाला और बदहाल किसान

भारत सरकार ने वैश्विक मंचों पर हमेशा सतत् विकास की बात को उठाया है किन्तु नीति निर्माताओं के नाक के नीचे दिल्ली एनसीआर से सटे मिलीनिएम सीटी गुरुग्राम में कुप्रबन्धन के और नजफगढ़ ड्रेन के ओवरफ्लो के कारण धनकोट, मोहम्मदहेड़ी, खेडक़ी, माक्डौला, दौल्ताबाद, चंदू, बुढ़ेडा एवं धर्मपुर गांव की लगभग 5600 एकड़ जलमग्न भूमि पिछले कई वर्षो से बदहाल है। 5600 एकड़ जमीन पर 1500 किसान परिवार निर्भर है, जहाँ कुछ समय पहले मकई, गेहूं और सब्जियों की खेती होती थी अब वहाँ गन्दगी, कचड़े का अम्बार ने अच्छी सी जमीन को वेट लैण्ड में बदल दिया। ये सीधे सीधे हमारे नीति निर्माताओं की अदूरदर्शिता का परिणाम है। कभी अरावली रेन्ज और दिल्ली के पर्यवास के हिस्सा रहे नज़फगढ़ और सरबती नदी को एक नाले के रुप में बदल दिया। पहले जहाँ पक्षियों की चहचाहट गूँजती थी, अब वहां गिध्द भी मड़राने से डरते है । आकिर ऐसा कैसे हुआ? ये वो प्रश्न है जो धनकोट, मोहम्मदहेड़ी, खेडक़ी, माक्डौला, दौल्ताबाद, चंदू, बुढ़ेडा एवं धर्मपुर गांव सहित का बच्चा- बच्चा सहित हर पर्यावरण के प्रति जागरुक नागरिक जानना चाहता है। मेरे अनुसार इसका जबाब है हरियाणा राज्य योजना आयोग औऱ गुरुग्राम जिला प्रशासन की अदूरदर्शिता औऱ समस्याओं के तात्कालिक समाधान की कोशिश। जब 1990 के बाद गुडगाँव शहर का प्रसार शुरु हुआ तब ही हमें दीर्घकालिक नीति अपनाते हुए शहर के आबादी के अवसाद का समुचित प्रबन्धन सोचना चाहिये था जो उन्होने नहीं किया। हमारे शासन और प्रशासन ने बढ़ती आबादी से टैक्स के रुप में लाभ तो कमाये लेकिन उसे यहाँ के संसाधनो के सतत प्रबन्धन में जो निवेश करना चाहिये था उसमें वो असफल रहे। परिणाम आज प्रत्यक्ष 1500 परिवार सड़क पर है साथ ही लाखों लोग नजफगढ़ नाले के प्रदुषणं का दंश झेल रहे है। केन्द्रीय प्रदुषण बोर्ड का मानना है कि यमुना नदी के प्रदुषण में 67 प्रतिशत योगदान नजफगढ़ नाले का है। ऐसे में कि जब केन्द्र सराकर ने राष्ट्रीय जल संरक्षण मिशन और स्वच्छ भारत मिशन चलाया है तो मेरा मानना है कि ये तब तक सफल नहीं होगा जब तक हम पुराने पर्यावास से जुडें जल स्त्रोतों को साफ नहीं करते। मेरा सुझाव है कि नजफगढ़ नाले पर बाँध इस समस्या को तात्कालिक उपाय है तो आप पास के सभी अवशिष्ट पदार्थों के मार्गों पर सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट इसका दीर्घ कालिक समाधान हो सकता है।